Nirmala Sitharaman Biography : 1959 में मदुरै में जन्मीं, यह Nirmala Sitharaman Biography भारत की पहली पूर्णकालिक महिला वित्त मंत्री की असाधारण यात्रा को दर्शाती है – जेएनयू की अर्थशास्त्री से लेकर रिकॉर्ड तोड़ने वाले बजट और रक्षा सुधारों तक। इस प्रेरणादायक Nirmala Sitharaman Biography में जानिए उनकी सफलता, उपलब्धियाँ और सांस्कृतिक प्रतीकों की कहानी
अध्याय 1: बचपन और शिक्षा – तमिलनाडु की जड़ें
निर्मला सीतारामन का जन्म 18 अगस्त 1959 को मदुरै (तत्कालीन मद्रास राज्य, अब तमिलनाडु) में एक तमिल अयंगर परिवार में हुआ। उनके पिता नारायण सीतारामन और मां सावित्री थीं। बचपन से ही वे एक साधारण लेकिन महत्वाकांक्षी परिवार में पली-बढ़ीं। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा विल्लुपुरम के सैक्रेड हार्ट कॉन्वेंट एंग्लो-इंडियन स्कूल में ली, उसके बाद चेन्नई के विद्योदया स्कूल, तिरुचिरापल्ली के सेंट फिलोमेना स्कूल और होली क्रॉस स्कूल से पूरी की।
अर्थशास्त्र में रुचि रखने वाली निर्मला ने 1980 में तिरुचिरापल्ली के सीतलक्ष्मी रामास्वामी कॉलेज से बीए की डिग्री हासिल की। फिर दिल्ली के प्रतिष्ठित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) से 1984 में अर्थशास्त्र में एमए और एमफिल किया। वे पीएचडी के लिए भी रजिस्टर हुईं, जिसमें इंडो-यूरोपियन व्यापार पर फोकस था, लेकिन बाद में इसे छोड़ दिया। यह दौर उनके जीवन का वह मोड़ था जब उन्होंने लंदन जाने का फैसला किया, जहां उनके पति को लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में स्कॉलरशिप मिली थी।
अध्याय 2: व्यक्तिगत जीवन और प्रारंभिक करियर – लंदन से भारत वापसी:-
जेएनयू में ही उनकी मुलाकात हुई आंध्र प्रदेश के नरसापुरम के अर्थशास्त्री और कमेंटेटर परकाला प्रभाकर से। दोनों की 1986 में शादी हुई, और उनका एक बेटी वंगमयी परकाला है, जो पहले ‘द हिंदू’ में काम कर चुकी हैं और वर्तमान में ‘मिंट लाउंज’ में पत्रकार हैं। परकाला प्रभाकर 2014-2018 तक आंध्र प्रदेश सरकार के कम्युनिकेशंस एडवाइजर रहे।
लंदन में निर्मला ने साधारण नौकरियां कीं – रीजेंट स्ट्रीट के होम डेकोर स्टोर ‘हैबिटेट’ में सेल्सपर्सन से लेकर ब्रिटिश कृषि इंजीनियर्स एसोसिएशन में एक अर्थशास्त्री के असिस्टेंट तक। वे प्राइसवाटरहाउसकूपर्स (पीडब्ल्यूसी) में रिसर्च एंड डेवलपमेंट में सीनियर मैनेजर रहीं और बीबीसी वर्ल्ड सर्विस में भी थोड़े समय के लिए काम किया। 1990 के दशक में वे भारत लौटीं और हैदराबाद में ‘प्रणव द स्कूल’ की फाउंडिंग डायरेक्टर बनीं। यह दौर उनके लिए सीखने का था, जहां उन्होंने कॉर्पोरेट जगत की बारीकियां समझीं।
अध्याय 3: राजनीति में प्रवेश – बीजेपी की आवाज से कैबिनेट तक:-
2003-2005 में वे राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य रहीं। 2008 में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) जॉइन की और 2014 तक राष्ट्रीय प्रवक्ता रहीं। उनकी तेज-तर्रार बहसें टीवी डिबेट्स में चर्चित रहीं। 2014 में नरेंद्र मोदी की पहली कैबिनेट में उन्हें वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और वित्त एवं कॉर्पोरेट अफेयर्स राज्य मंत्री बनाया गया। उसी साल वे आंध्र प्रदेश से राज्यसभा सांसद चुनी गईं (2014-2016), फिर कर्नाटक से (2016 से अब तक, वर्तमान टर्म 2022-2028)।
2017 में उन्हें रक्षा मंत्री बनाया गया – भारत की दूसरी महिला रक्षा मंत्री (इंदिरा गांधी के बाद) और पहली फुल-टाइम। उनके कार्यकाल में 2019 का बालाकोट एयरस्ट्राइक (पुलवामा हमले के जवाब में) हुआ, जो उनकी दृढ़ता का प्रतीक बना।
अध्याय 4: वित्त मंत्री के रूप में स्वर्णिम दौर – उपलब्धियां और चुनौतियां
- 2019: भारत की दूसरी महिला वित्त मंत्री बनीं।
कोविड राहत पैकेज (2020):
- आत्मनिर्भर भारत अभियान – ₹20 लाख करोड़ (GDP का 10%)
- PM गरीब कल्याण योजना – 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन, गैस सिलेंडर
- टैक्स सुधार:
- कॉर्पोरेट टैक्स 30% → 22% (नई कंपनियों के लिए 15%)
- GST रिफॉर्म – रिटर्न फाइलिंग सरल, रेट स्लैब में कमी
- इंफ्रास्ट्रक्चर बूस्ट:
- राष्ट्रीय इंफ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन (NIP) – ₹111 लाख करोड़ का प्लान
- 2021-25 बजट में ₹11 लाख करोड़ इंफ्रा पर खर्च
अध्याय 6: इतिहास रचतीं – भारत की पहली पूर्णकालिक महिला रक्षा मंत्री
- सितंबर 2017: रक्षा मंत्रालय की कमान
- ऐतिहासिक कदम:
- ‘वन रैंक वन पेंशन’ पूरी तरह लागू
- सीमा पर सैनिकों के लिए आधुनिक सुविधाएँ
- स्वदेशी हथियार: तेजस, ब्रह्मोस उत्पादन में तेज़ी
- बालाकोट एयरस्ट्राइक (2019): साहस का प्रतीक